शिक्षक उद्धरण
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    स्वामी विवेकानंद

    आध्यात्मिक शिक्षक और युवा प्रतीक

    India 1863 – 1902

    जीवनी

    स्वामी विवेकानंद एक हिंदू संन्यासी और भारत के सबसे प्रसिद्ध आध्यात्मिक नेताओं में से एक थे। 1893 में शिकागो में विश्व धर्म संसद में "अमेरिका की बहनों और भाइयों" से शुरू हुए उनके ओजस्वी भाषण ने उन्हें विश्व प्रसिद्धि दिलाई। रामकृष्ण परमहंस के शिष्य विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की और अपना जीवन शिक्षा, सामाजिक सुधार और आध्यात्मिक जागरण को समर्पित किया।

    प्रसिद्ध

    शिकागो भाषण 1893रामकृष्ण मिशनभारत के युवा प्रतीकराष्ट्रीय युवा दिवस (12 जनवरी)मनुष्य-निर्माण शिक्षा

    शिक्षण दर्शन

    विवेकानंद मनुष्य-निर्माण शिक्षा में विश्वास करते थे जो चरित्र, शक्ति और आत्मनिर्भरता का निर्माण करती है। उनका मानना था कि सच्ची शिक्षा मन को जानकारी से भरना नहीं बल्कि भीतर की पूर्णता को बाहर निकालना है।

    स्वामी विवेकानंद के उद्धरण

    "शिक्षा मनुष्य में पहले से मौजूद पूर्णता की अभिव्यक्ति है।"
    स्वामी विवेकानंद
    "उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।"
    स्वामी विवेकानंद
    "हम वह शिक्षा चाहते हैं जिससे चरित्र का निर्माण हो, मन की शक्ति बढ़े, बुद्धि का विस्तार हो और जिससे व्यक्ति अपने पैरों पर खड़ा हो सके।"
    स्वामी विवेकानंद
    "आप बच्चे को उतना ही सिखा सकते हैं जितना आप पौधे को उगा सकते हैं। आप केवल मदद कर सकते हैं।"
    स्वामी विवेकानंद